लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट आंकड़े बताते हैं कि राज्य के कुल राजस्व व्यय का बड़ा हिस्सा प्रशासनिक और वित्तीय दायित्वों में ही खर्च होगा। अनुमान है कि कुल राजस्व व्यय का 53.2 प्रतिशत केवल वेतन, पेंशन और ऋण पर ब्याज भुगतान में चला जाएगा। इन तीन मदों पर सरकार करीब 3,53,743.33 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जो बजट संरचना में इन खर्चों की बड़ी हिस्सेदारी को दर्शाता है।
पूंजीगत खर्च के लिए 1.77 लाख करोड़ का प्रावधान
राज्य सरकार ने परिसंपत्ति निर्माण और रोजगार सृजन जैसे विकास कार्यों के लिए पूंजीगत परिव्यय के तहत 1,77,744.12 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह राशि राजस्व व्यय की तुलना में काफी कम है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार के सामने वित्तीय प्रतिबद्धताओं का बोझ अभी भी बड़ा बना हुआ है।
वेतन, पेंशन और ब्याज का विस्तृत अनुमान
बजट आंकड़ों के अनुसार 2026-27 में कर्मचारियों के वेतन पर 1,82,921.28 करोड़ रुपये, पेंशन भुगतान पर 1,01,901.03 करोड़ रुपये और ऋण के ब्याज पर 68,921.02 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कुल मिलाकर राज्य सरकार का अनुमानित राजस्व व्यय 6,64,470.55 करोड़ रुपये है।
राजस्व व्यय में क्या-क्या शामिल होता है
राजस्व व्यय के अंतर्गत सरकारी विभागों और सेवाओं का संचालन, ऋण पर ब्याज भुगतान, तथा स्थानीय निकायों को अनुदान और आर्थिक सहायता जैसी मदें शामिल रहती हैं। इसी ढांचे के भीतर वेतन, पेंशन और ब्याज की संयुक्त हिस्सेदारी 53.2 प्रतिशत आंकी गई है।
पिछले वर्षों से तुलना में कमी
वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में राजस्व व्यय का 57.3 प्रतिशत वेतन, भत्ते और ब्याज पर खर्च का अनुमान लगाया गया था, जिसे संशोधित अनुमान में घटाकर 56.1 प्रतिशत किया गया। वहीं 2024-25 में इन मदों की हिस्सेदारी 56.3 प्रतिशत रही थी। नए बजट के अनुमान से संकेत मिलता है कि इन खर्चों का अनुपात कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन अभी भी कुल व्यय का आधे से अधिक हिस्सा इन्हीं पर जा रहा है।
